Explainer: अमेरिका-इजरायल के भी छूट रहे पसीने, ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों आसान नहीं, 10 प्वाइंट्स में जानें
Explainer: अमेरिका-इजरायल के भी छूट रहे पसीने, ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों आसान नहीं, 10 प्वाइंट्स में जानें
Edited By: Kajal Kumari@lallkajal
Published : Mar 12, 2026 11:47 pm IST,
Updated : Mar 12, 2026 11:47 pm IST
ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने हमला किया, जिसका ईरान मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। खाड़ी में उपजे इस तनाव से तेल का संकट गहरा गया है। आखिर अमेरिका की चाहत क्यों नहीं हो पा रही पूरी, ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान क्यों नहीं है?
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ईरान में जारी युद्ध
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के किए गए हमले का आज 13वां दिन है और आज देश के सुप्रीम लीडर रहे दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई ने पिता की मौत के बाद सुप्रीम लीडर का पद ग्रहण करने के बाद पहली बार अपना संदेश जारी किया। उन्होंने दुश्मनों को चेतावनी दी और सथ ही कहा कि अपने पिता की मौत और स्कूल पर किए गए कायराना हमले में बच्चियों की मौत की कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा, होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। उनके संदेश से पहले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बेगर ग़ालिबफ़ ने भी चेतावनी दी थी और कहा था, "हम सारा प्रतिबंध त्याग देंगे और फ़ारसी खाड़ी पर आक्रमण करने वाले आतंकवादियों को खून से नहला देंगे। अमेरिकी सैनिकों का ख़ून ट्रम्प की व्यक्तिगत जिम्मेदारियां हैं।"
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आखिर अमेरिका और इजरायल ने क्यों किया हमला
ईरान आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए हैं। इन हमलों ने ईरान में बड़ी तबाही मचाई है। अमेरिका और इजराइल दोनों ईरान में तख़्तापलट चाहते हैं। अमेरिका ने ईरानियों से अपनी सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील भी की थी, लेकिन उनकी चाल अबतक कामयाब नहीं हुई है। इसकी वजह ये है कि ईरान की सत्ता का सिस्टम ऐसे बनाया गया है कि वह टिकाऊ रहे और उसे आसानी से गिराया न जा सके।
ईरान में सत्ता परिवर्तन क्यों आसान नहीं है?
ईरान का राजनीतिक ढांचा ऐसा बनाया गया है जो बड़े से बड़े झटकों को भी झेल सके और इसीलिए ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान काम नहीं है। देश में पूरी संरचना हाइड्रा जैसी बनाई गई है जैसे आप अगर यहां सत्ता परिवर्तन के लिए एक सिर काटते हैं तो कई नए सिर उग आते हैं। यही वजह है कि सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद तुरंत आनन फानन में उनके बेटे मुज्तबा ख़ामेनेई को उनका उत्तराधिकारी चुन लिया गया। मुज्तबा के बारे में कहा जा रहा है कि वे भी अपने पिता की कट्टर नीतियों को ही आगे बढ़ाएंगे। ईरान हमेशा से युद्ध के बड़े झटकों को झेलने में ज़्यादा सक्षम रहा है।
ईरान में तानाशाही की बजाय, बहुस्तरीय-तानाशाही है जो कई चरणों में काम करती है, जिसमें राजनीतिक इस्लाम और कट्टर ईरानी राष्ट्रवाद के समर्थकों बीच का गठबंधन है। यहां की सत्ता कई केंद्रों में बंटी हुई है, जिसमें धार्मिक निकाय, सशस्त्र बल और अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से शामिल हैं। इसकी वजह से इस देश में सत्ता परिवर्तन एक व्यक्ति की तानाशाही के मुकाबले कहीं ज़्यादा मुश्किल है।
ईरान में पूरी व्यवस्था का ढांचा संस्थान बनाते हैं और सुरक्षा बलों को उसकी ताक़त माना जाता है। ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, वहां की सेना के साथ काम करता है और इसे अक्सर व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। सैन्य भूमिका से आगे बढ़कर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स एक राजनीतिक और आर्थिक ताक़त भी बन चुका है। ईरान में सुरक्षा बल एकजुट रहे हैं, जिन्हें काबू करना मुश्किल है।
ईरान के उप रक्षा मंत्री रज़ा तलाइनिक ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि हर आईआरजीसी कमांडर के लिए तीन स्तर नीचे तक उत्तराधिकारी तय किए जाते हैं ताकि व्यवस्था लगातार चलती रहे। ईरान की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से पर राज्य से जुड़े संगठनों का नियंत्रण है।
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आईआरजीसी का कारोबारी साम्राज्य, जिसमें ख़ातम अल-अनबिया कांग्लोमरेट भी शामिल है, व्यापार से जुड़े इस "पैट्रनज" सिस्टम को और मजबूत करता है। पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को काफ़ी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ये नेटवर्क अहम अभिजात वर्ग को सुरक्षित रखते हैं और व्यवस्था के बने रहने में उनके हितों की रक्षा करते हैं।
ईरान में सत्ता बनाए रखने में धर्म भी अहम भूमिका निभाता है और दूसरी कि ऐतिहासिक रूप से ईरान का विपक्ष बंटा हुआ रहा है और उसकी ताकत सत्ता परिवर्तन के लायक नहीं। पिछले सालों में व्यवस्था के ख़िलाफ़ कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं, जैसे 2009 का ग्रीन मूवमेंट और 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन, लेकिन प्रदर्शनों में केंद्रीय नेतृत्व की कमी रही और इन्हें राज्य के सख़्त दमन का सामना करना पड़ा।
ईरान की निगरानी व्यवस्था क्षेत्र की सबसे उन्नत निगरानी व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें लगातार इंटरनेट बंद करना, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी शामिल है जो नियंत्रण अपने पास रखती हैं। दूसरी वजह ये है कि ईरानी लोग सत्ता परिवर्तन की मांग करने से हिचकते रहे. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में अमेरिका के नेतृत्व वाले हस्तक्षेप के बाद की स्थिति देखी थी।
अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत वर्तमान व्यवस्था के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि उनके जैसा दूसरा नहीं होगा। उनका उत्तराधिकारी कभी भी वैसी सत्ता नहीं रख पाएगा जैसी ख़ामेनेई के पास थी। लेकिन इस्लामी गणराज्य का पतन अभी तय नहीं है।अगर यह हुआ और इसके पीछे विदेशी सैन्य हस्तक्षेप रहा, तो आगे की स्थिति और ख़राब हो सकती है।
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न्यूज एजेंसी एपी ने बताया था कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने से ठीक पहले किए गए एक अमेरिकी खुफिया आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में सत्ता परिवर्तन होने की संभावना नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया परिषद (एनआईसी) की फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, "चाहे सीमित हवाई हमले हों या बड़े पैमाने पर और लंबे समय तक चलने वाला सैन्य अभियान, इससे ईरान में एक नई सरकार के सत्ता में आने की संभावना नहीं है, भले ही वर्तमान नेतृत्व को हटा दिया जाए।"
सूत्रों के अनुसार, खुफिया रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि यदि नेतृत्व को हटा दिया जाता है तो ईरान पर कब्जा करने के लिए कोई भी विपक्षी गठबंधन इतना मजबूत या एकजुट नहीं है और यदि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो जाती है तो ईरान की सत्ता संरचना सत्ता की निरंतरता बनाए रखने का प्रयास करेगी। मूल्यांकन परिणामों के अनुरूप, ईरान के शीर्ष धर्मगुरुओं ने 8 मार्च को दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को अपना नया सर्वोच्च नेता चुना। माना जाता है कि नए नेता का रुख अपने पिता से कहीं अधिक कठोर है, और उनका चयन ईरानी नेतृत्व द्वारा (अमेरिका के प्रति) प्रतिरोध का एक मजबूत संकेत माना जा रहा है, जो दर्शाता है कि ईरानी सरकार आसानी से सत्ता नहीं छोड़ेगी।
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